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Wednesday, August 25, 2010

क़यामत



आज कुछ जख्म भर आये है
आँखों में उनकी नजरो के कुछ सपने सुहाने आये है
एक भोली सी नजर है वह
जिन के दिल के करीब हम आये है
तम्मनाओं की बहार से
एक कशिश लौट आई है
दश्त इ सहरा में एक कली सी खिल आई है
एक सवाल के आरजू से
वो जवाब बन के आई है
एक मासूम सा चेहरा है चेहरे पे लाली छाई है
इस संगदिल में धड़कन धडकते आई है
लगता है मुर्दे भी जिन्दा होते है
एक क़यामत जिंदगी बन के आई है
जयदीप भोगले
१८ नवम्बर २००३ 

एव्हरेस्ट

 ज्याचे त्याचे एव्हरेस्ट एव्हरेस्ट अस शिखर एकच नसतं प्रत्येक माणसाचं एव्हरेस्ट वेगळं असतं उंची कमी जास्त असेल समाजात शिखराची पण सर केल्यावरच...