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Monday, August 23, 2010

पलटते पन्ने


इन पन्नो में लिखी कहानी कुछ नयी है कुछ पुरानी है
पलटते रहना ही बस इनके जिन्दगी की कहानी है
   कुछ हसीं लम्हों का जमाना इनमे छुपता है
   कभी तडपता दिल इनके सिने में सिसकता है

   पहली बरसात तो पहला पन्ना था
   अब गम के आंसू से ही इनको निभानी है
                कभी इंद्रधनुष भी इनमे बसता था
               एक चेहरे का चांद इनमे दिखता था
              अब चांदनी कि चमक तो चली गयी
             बस बुझते दिल कि रोशनी में जिंदगी कि कहानी लिख जानी है
     दिदार ए यार का बयां इसपे लिखा है
     ज़माने भर का प्यार इसमें बीता है
   अब हिज्र की कलम से ही इनको तक़दीर आजमानी है
    पलटते रहना ही बस इनके जिन्दगी की कहानी है
जयदीप भोगले
३० जून 2001

एव्हरेस्ट

 ज्याचे त्याचे एव्हरेस्ट एव्हरेस्ट अस शिखर एकच नसतं प्रत्येक माणसाचं एव्हरेस्ट वेगळं असतं उंची कमी जास्त असेल समाजात शिखराची पण सर केल्यावरच...