जब तूफ़ान में किसीका इंतज़ार होता है
तो एक पैगाम भी साहिल बन जाता है
ना सफ़र पता है ना मंजील
बस पैगाम का सहारा ही नाव का किनारा बन जाता है
एक तिनका भी किसी के प्यार का
इंतज़ार में कश्ती बन जाता है
उसीसे आती है तूफ़ान से लड़ने की उमीदे
लहरों का सामना भी उसीसे आसान हो जाता है
एक नजर के खातिर मीलो पार हो जाते है
जब उनकी आखों में प्यार का इकरार नजर आता है
एक ख़त के भरोसे कट सकती है जिंदगी
एक ख़याल मुलाक़ात का उनका दामन बन जाता है
जब कोई ख़त के लिए तड़पता है
उसके जिंदगी का लम्हा भी तूफ़ान बन जाता है
इंतज़ार होता है एक लब्ज़ का
उसका ना होना क़यामत बन जाता है
जयदीप भोगले
२००५
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