Wednesday, August 25, 2010

अनकही


 कभी सपने हकीकतों के साथ
कभी आँखों और आंसुओ की बात
कभी तन्हाई और वो ख़यालात
यही है अनकही एक कहानी के साथ
               एक बारिश की बूँद धुप के बाद
               एक फूल की नरमी कांटो के बाद
                 वो बेखुदी कारवां के साथ
                यही है अनकही एक कहानी के साथ
एक आवाज ख़ामोशी के पास
एक लहर एक पत्थर के पास
एक जिन्दगी क़यामत के साथ
यही है अनकही एक कहानी के साथ
जयदीप भोगले
१२ नवम्बर २००४

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