Thursday, September 30, 2010

जिस बला में जिंदगी अटकी .

मित्रांनो , गेले पाच दिवस मी लिहले नाही मग आता मला फार खुमखुमी आली आहे म्हणून लिहितो आणि ते ही थोडेस वेगळे
ही गोष्ट पुण्याची साल २००३ .. मी एका छोट्या ऑटोमोबाईल कारखान्यात कामाला होतो . तसे पहिले तर मी एक योग योगाने झालेला इंजिनिअर .. ( तसे बरेच जण माझ्याच गटात येतात पण कबूल कमी जण करतात .. असो )
 कारखाना छोटा होता आणि मी नवशिका त्यामुळे सुरवातीला सी एन सी मशीन वर काम करयचो .. आता सी एन सी ही एक स्वयंचलित मशीन असते यापलीकडे फार काही सांगत नाही .. इंजिनिअर आणि तत्सम लोकांना ती की आहे हे  कळेल आणि इतरांना जाणून घ्यावे असे काही त्यात नाही म्हणून ..सी एन सी . आता साहित्यात कवितेत लोकांमध्ये रमणारा मी .. मला मशीन बरोबर काही मजा यायची नाही..कदाचित म्हणून मी काही संगणक क्षेत्रात काम केले नाही .. (असो विषयांतर नको)..
मला या मशीनचा जाम राग यायचा पण एम बी ए च्या परीक्षांसाठी लागणारा पैसा साठावा.. उगीच लोकांनी बेकार म्हणू नये .. आणि काही नाही तर पाट्या टाकत कुठेतरी जाऊन नक्कीच पोहचू म्हणून मी एक एक दिवस पुढे जात होतो ...
मी कविता करतो हे माझ्या इतर कामगार मित्रांना माहिती होते .. त्यांनी मला आमच्या सी एन सी मशीन बद्दल काहीतरी लिहायला सांगितले .पण मी मात्र सी एन सी ची  खुन्नस डोक्यात ठेउन कविता केली .कविता हिंदीत होती  . 
मी इंजिनिअर महाराष्ट्राबाहेर झाल्यामुळे माझ्यावर हिंदी भाषेचे तितकेच संस्कार झाले कारण तीच बोली भाषा होती .. म्हणून मी हिंदी कविता केली (तश्या मी मराठी मध्ये ही कविता केल्या)  ..
कदाचित या कवितेमधली  खरी मजा एखादा मेकानिकल इंजिनिअर किंवा तांत्रिक क्षेत्राचे लोक आधी घेऊ शकतील पण कवितेचा आस्वाद सर्व वाचक घेतील अशी अशा बाळगतो ..

जिस बला में जिंदगी अटकी ..
उसका नाम सी एन सी
स्पिंडल की स्पीड ने
टरेट की फीड ने 
अत्याचारों की भीड़ लगा दी 
जिस की आवाज से 
एक आग से दिल में भड़की 
उसका नाम सी एन सी 
                        भावनओं पे कट इसने निकाल दिया 
                         उसमे एक लम्बे ग्रूव का घाव भी जड़ा दिया 
                          साइकल टाइमिंग लगा के जवानी को कुरेद दिया
                           और इस सोच में पड़ गया तो 
                           जो  धम से पार्ट पे धडकी 
                         उसका नाम सी एन सी
सरफेस फिनिश ने सपनो को फिनिश किया
आर ए के नाम से दिल में डर सा आ गया
जब सब को बदल दिया तो ,
जिसकी रेडिअस स्टेप जैसे खटकी 
उसका नाम सी एन सी
                             कभी टार्गेट की मार से
                             तो कभी क्वालिटी के वार से
                             करिअर के ग्राफ को टेपर सा आ गया
                             जो इस सोच में पड़ गया 
                              तो मेनेजर बोला .. तेरे प्रोसेस कंट्रोल की लाइन नीचे कैसे अटकी 
                              जो इतने करतब दिखा के ना अटकी 
                              उसका नाम सी एन सी
कभी फानुक कभी मझाक
ये सीनुमेरिक भी ना आये बाज 
कंट्रोल सब अलग अलग
मगर सब की एक ही आवाज
इनके प्रोग्राम से पूरी सेटिंग ही भटकी
उसका नाम सी एन सी
                                   पर जब मैंने सोचा 
                                    जिसने सौ बेकारो को निवाला दिया 
                                    मुझ जैसे बेसहारा को सहारा दिया 
                                      एक्स्पिरिएन्स  ना होके आसरा दिया 
                                      उसका नाम सी एन सी
                                       जिसने डूबती जिन्दगी कंट्रोल की 
                                        उसका नाम सी एन सी उसका नाम सी एन सी...

त्या रात्रि संध्याकाळी सेकंड शिफ्ट ला मशीन पेक्षा माझ्या सगळ्या मित्रांच्या टाळ्याचा आवाज जास्त होता ...
तितक्यात आमचे म्यानेजर आले .. काय रे भाऊ ? काय करत आहात ? ..
तात्या ... याने बघा किती चांगली कविता केली आहे ...साहेबानी त्या कागदाकडे कसपट असल्यागत पाहिले ...
अरे पण यासाठी २० मिनिटे मशीन बंद ठेवली तेवढा वेळ कोण भरून काढणार.. जरा टाइमपास कमी कर आणि  काम कर म्हणजे पुढे जाशील ..
त्यादिवशी टाळ्याचा डोहात कुणीतरी वास्तववादी चिखालाचा दगड टाकुन पाणी गढूळ   केले असे वाटुन गेले  ...
आणि काही दिवसात मी हे क्षेत्र  आपला प्रान्त नाही हे उमजुन पाउल पुढे टाकले आणि पाणी वाहते केले ...
पण आजही आठवणीच्या शेंगा खाताना एखादी  खवट शेंग असल्यागत तो प्रसंग आठवतो ...  

टीप - टरेट - ( मशीनवर धारधार टूल लावण्यासाठी असलेले रिंग )
फीड - या परिमानाने पोलाद कट केले जाते 
प्रोसेस कंट्रोल चार्ट  - सान्खिक्की पद्धतीने काढलेला आलेख 

जयदीप भोगले
३०- ०९-२०१० 
कविता - १८ -१०-२००३
   


                   

No comments:

Post a Comment

पतंग

पतंग होऊनि उडे अस्मानी दुनिया बघते होऊन दिवाणी सैर सपाटा पतंग करतो परी, मांजा पकडे एक शहाणी म्हणे कशी ती तू स्वछन्दी पवन अश्व...